अगर मैं अपना हाथ बढ़ाऊ, तो क्या उसे थामोगे?
अगर मैं अपनी बाहों को फैलाऊ, तो क्या मुझे गले लगाओगे?
होंठो की बात तो दूर है  
पर क्या मैं तुम्हारे दिल को चुरा लू, तो क्या मुझसे प्यार करोगे?
मैं दिल बन के तुझ में धड्कुंगा !
तेरी साँसों में बन के खुसबू मेह्कुंगा !!
एक बार तो यकीन कर ले मुझपे ऐ यार !
तेरे हर दर्द का जख्म अपना समझ के सह लूँगा !!